Updated on: Thu, 15 Nov 2012 08:44 PM (IST)
हमीरपुर कार्यालय : दीपावली के बाद द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त जयंती मनाई गई। कायस्थ समाज के लोगों ने ने भगवान चित्रगुप्त जी का पूजन कर कलम-दवात की पूजा की।
नगर के पुराना गैस गोदाम में चित्रगुप्त पूजन कार्यक्रम की शुरुआत माल्यार्पण व आरती के साथ हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रमोद खरे ने समाज की बेहतरी के लिए शिक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की बात कहते हुए कहा कि आरक्षण के इस दौर में समाज के लोग अपना स्वयं का रोजगार स्थापित कर परिवार का भरण पोषण करें। रजनीश व विष्णु खरे ने समाज के संगठन पर जोर दिया। इस अवसर पर आशीष खरे, अतुल सक्सेना, रवीन्द्र,बृजेश निगर, नितिन, नीरज श्रीवास्तव सहित तमाम लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में धर्मेन्द्र खरे ने सभी उपस्थिति कायस्थ बंधुओं का आभार व्यक्त किया।
मंगलकामना करता है कायस्थ समाज
'कार्यस्थ' शब्द अपभ्रंश होते-होते 'कायस्थ' हो गया। जिस तरह क्षत्रिय शस्त्र पूजन, ब्राह्मण शास्त्र पूजन, वैश्य वसना पूजन करते हैं, वैसे ही कायस्थ समाज कलम पूजन करते है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार चित्रगुप्त धर्मराज के अंशावतार और उनके विशिष्ट सहयोगी माने जाते हैं। स्वर्ग का लेखा-जोखा उन्हीं के द्वारा किया जाता है। इनके दो विवाह हुए थे, प्रथम विवाह ब्राह्मणी व द्वितीय क्षत्राणी से हुआ। उनसे क्रमश: 4 व 8 संतानें पैदा हुई जो 12 अलग-अलग श्रेणियों में (निगम, भटनागर, माथुर, सक्सेना आदि) बंटे। इनमें भानू (श्रीवास्तव) सबसे बड़े भाई हैं। कायस्थ समाज पूरे हर्षोल्लास के साथ महाराज चित्रगुप्त का पूजन करता है। इस पूजन में कलम-दवात की पूजा होती है। भगवान से कार्यकुशल होने की कामना की जाती है।
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